Makar Sankranti 2022 Date, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त एवं महत्व

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Makar Sankranti 2022 Date, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त एवं महत्व

Makar Sankranti 2022 Date : मकर संक्रांति को हिंदु रीति रिवाजों के अनुसार बहुत पवित्र माना जाता है। इस त्योहार को अलग अलग प्रदेशों में लोग अलग अलग नामों से जानते हैं। जैसा की आप जानते हैं भारत विविधता में एकता का परिचायक है, यहाँ एक ही त्योहार को अलग अलग तरीके से मनाया जाता है। मकर संक्रांति की बात करे तो इसे उत्तर भारत में मकर संक्रांति (Makar Sankranti) ही बोलते हैं परंतु दक्षिण भारत में इस दिन पोंगल (Pongal) तथा असम में बीहू (Bihu) नाम से मनाया जाता है।


Makar Sankranti 2022 Date, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त एवं महत्व

इस त्योहार के दिन एक अलग ही ऊर्जा व उत्सव का माहौल होता है। लोग अच्छे अच्छे पकवान बनाते हैं और पतंगबाजी तथा अन्य खेलों को आयोजन भी किया जाता है। मकर संक्रांति के दिन गुजरात की पतंगबाजी देश विदेश में प्रसिद्ध है।

Makar Sankranti 2022 Date : सूर्य जब मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो इसे हिंदू धर्म में मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है. मकर संक्रांति के पर्व को देश के अलग-अलग हिस्से में अलग- अलग नामों से जाना जाता है. मकर संक्रांति को पंजाब में लोहड़ी, उत्तराखंड में उतरायणी, गुजरात में उत्तरायण, केरल में पोंगल कहा जाता है. इसके साथ ही कहीं कहीं इसे खिचड़ी का पर्व भी कहा जाता है.


2022 में मकर संक्रांति कब है?

पंचांग के अनुसार वर्ष 2022 में मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी 2022, शुक्रवार को पौष मास की शुक्ल पक्ष की द्वादशी की तिथि को मनाया जाएगा.

मकर संक्राति 2022- शुभ मुहूर्त

मकर संक्राति पुण्य काल – दोपहर 02:43 से शाम 05:45 तक
अवधि – 03 घण्टे 02 मिनट
मकर संक्राति महा पुण्य काल – दोपहर 02:43 से रात्रि 04:28 तक
अवधि – 01 घण्टा 45 मिनट


मकर संक्रांति पूजा विधि

  • पंच पात्र में थोडा़ सा जल भरें।
  • उसके बाद एक लकड़ी की चौकी रखें और इसे साफ करने के लिए थोड़ा गंगाजल छिड़कें।
  • फिर इसे नया पीले कपड़े के टुकड़े से ढक दें।
  • एक मुट्ठी कच्चे चावल लें और दाहिनी ओर एक छोटा सा ढेर बना लें।
  • इसे चार बार दोहराएं और चावल के ढेर को एक के बाद एक बायीं ओर रखें।
  • प्रत्येक ढेर पर भगवान गणेश, भगवान शिव, भगवान विष्णु, देवी लक्ष्मी और सूर्य भगवान की मूर्ति/छवि को सम्मानपूर्वक रखें।
  • तेल का दीपक जलाकर चौकी के दाहिने कोने में रखें।
  • एक-एक करके सभी देवताओं पर थोड़ा पानी छिड़कें।
  • भगवान गणेश का आह्वान करके और उनका आशीर्वाद मांगकर पूजा शुरू करें।
  • हल्दी, चंदन, कुमकुम, जनेऊ, कलावा, दूर्वा घास, फूल, धूप और एक फल चढ़ाएं।
  • गणेश गायत्री मंत्र का जापन करें ओम एकदंतय विद्धमाहे, वक्रतुंडय धीमहि तन्नो दंति प्रचोदयत
  • भगवान गणेश से प्रार्थना करने के बाद, भगवान शिव की पूजा करें। चंदन, जनेऊ, कलावा, विल्व पत्र, फूल (यदि संभव हो तो धतूरे के फूल), धूप और फल चढ़ाएं।
  • रुद्र गायत्री मंत्र का जापन करें ओम तत्पुरुषाय विद्माहे महादेवय धिमहि तन्नो रुद्रा प्रचोदयत
  • भगवान शिव की पूजा करने के बाद भगवान विष्णु को हल्दी, चंदन, कुमकुम, जनेऊ, कलावा, तुलसी के पत्ते, फूल, धूप और एक फल चढ़ाएं।
  • विष्णु गायत्री मंत्र का जापन करें ओम नारायणाय विद्माहे वसुदावये धिमहि तन्नो विष्णु प्रचोदयत
  • भगवान विष्णु की पूजा करने के बाद देवी लक्ष्मी की पूजा करें। हल्दी, चंदन, कुमकुम, कलावा, कमल / फूल, धूप और एक फल और एक तंबूलम (जिसमें भूरे रंग का नारियल होता है, जिसकी भूसी दो टुकड़ों में टूट जाती है, पान के पत्ते और सुपारी, कुछ केले / फल, हल्दी, कुमकुम, कुछ मुद्रा सिक्के और ताजे कपड़े का एक टुकड़ा)।
  • लक्ष्मी गायत्री मंत्र का जापन करें ओम महालक्षमैच्य विद्माहे विष्णु पटनाच्य धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयत
  • देवी लक्ष्मी से प्रार्थना करने के बाद, सूर्य भगवान की पूजा करें। हल्दी, चंदन, कुमकुम, जनेऊ, कलावा, फूल, धूप और एक फल चढ़ाएं। बाद में, आप सूर्य का सामना करते हुए अर्घ्य (सूर्य भगवान को जल अर्पित करने का एक अनुष्ठान) भी कर सकते हैं।
  • सूर्य गायत्री मंत्र का जापान ओम आदित्य विद्माहे, मार्तंडय धीमही, तन्नो सूर्य प्रचोदयत का जप करें।
  • प्रत्येक देवता की आरती कपूर जलाकर कर पूजा का समापन करें।



मकर संक्रांति का महत्व

हिंदू धर्म में मकर संक्रांति के पर्व को महत्वपूर्ण माना गया है. इस दिन पवित्र नदी में स्नान और दान का विशेष पुण्य बताया गया है. मकर संक्रांति पर सूर्य देव उत्तरायण होते है. मान्यता के अनुसार इस दिन से ही ऋतु में परिवर्तन आरंभ हो जाता है. मकर संक्रांति से सर्दी में कमी आने लगती है यानि शरद ऋतु के जाने का समय आरंभ हो जाता है और बसंत ऋतु का आगमन शुरू हो जाता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मकर संक्रांति के बाद से ही दिन लंबे रातें छोटी होने लगती हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन भगवान आशुतोष ने भगवान विष्णु को आत्मज्ञान का दान दिया था. महाभारत की कथा के मुताबिक भीष्म पितामह ने अपनी देह का त्याग मकर संक्रांति पर किया था.


मकर संक्रांति के खिचड़ी खाने का महत्व 

मकर संक्रांति के उपलक्ष में देश में फसल कटाई का त्योहार मनाया जाता है। नए नए धान से बनी खिचड़ी को सूर्य भगवान को भी अर्पित किया जाता है और उसके बाद खाया जाता है। इस दिन खिचड़ी खाना वो भी नए चावल से बनी बहुत ही शुभ होता है। इसे फसल कटाई के त्योहार के रूप में जाना जाता है।चारों तरफ खुशी का एक वातावरण होता है। इसी त्योहार को दक्षिण भारत में अलग रूप में पोंगल (Pongal) मनाया जाता है तथा असम में बीहू (Bihu), केरल में ओणम (Onam) मनाया जाता है।

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