50+ Shaheed Diwas Poem in Hindi | शहीद दिवस पर कविता 2022

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Shaheed Diwas Poem in Hindi

Shaheed Diwas Poems in Hindi 2022: शहीद दिवस प्रतिवर्ष 23 मार्च और 30 जनवरी को मनाया जाता है। 23 मार्च 1931 की मध्यरात्रि को अंग्रेजी हुकूमत ने भारत के तीन वीर सपूतों – भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरू को फांसी दिया गया. इसलिए उनकी याद में 23 मार्च को शहीद दिवस मनाया जाता है. 30 जनवरी, 1948 में नाथू राम गोडसे ने गोली मारकर राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की हत्या कर दी थी. iइसलिए उनकी पुण्यतिथि 30 जनवरी को भी “शहीद दिवस” के रूप में मनाया जाता है. देश के सभी लोगों के लिए आज का यह दिन खास होता है । आज़ादी दिलाने वाले महावीर आज़ादी के योद्धा महान स्वतन्त्रता नायक भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को याद करते हैं और उन्हें हम सभी श्रद्धांजलि देते हैं.

यहां हमने शहीदों के सम्मान में शहीद दिवस पर कविता दिए हुए हैं जिन्हें पढ़कर आपको बहुत ही अच्छा लगने वाला है इसे पढ़कर आपके मन मे भी अपने देश के प्रति देशभक्ति की भावना जाग जाएगी । यदि आपको अपने स्कूल कॉलेज आदि में शहीद दिवस के अवसर पर कोई कविता बोलने का मौका मिला तो आप हमारे इस लेख की मदद से बोल सकते है इसे पढ़कर

Shaheed Diwas Poem in Hindi

सच्चे सपूत थे भारत माँ के, अपना सुख-दुःख सब भूल गए,
माता की बेड़ी तोड़ने को हंसते-हंसते फांसी झूल गए।

 

वे बड़े अमर बलिदानी थे, फंदे को जिसने चूमा था,
मेरा रंग दे बसंती चोला पर मरते मरते भी झूमा था।

 

आदर्श बने लाखों युवा के नाम है जब तक है गगन,
सिंह भगत, सुखदेव, गुर है आपको शत-शत नमन।

शहीद भगत सिंह पर कविता

हुआ देश का तू दुलारा भगत सिंह,
झुके सर तेरे आगे हमारा भगत सिंह।

 

नौजवानों के हेतु हुए आप गांधी,
रहे राष्ट्र के एक गुवारा भगत सिंह।

 

किया काम बेशक है हिंसा का तुमने,
यही दोष है इक तुम्हारा भगत सिंह।

शहीद दिवस हिन्दी कविता

मगर देश हित के लिए जान दे दी,
बढ़ी शान तेरी हमारे दिलों में भगत सिंह।

 

तेरी देशभक्ति पे सब हैं न्योछावर,
अभय तेरा साहस है न्यारा भगत सिंह।

 

हुआ देश का तू दुलारा भगत सिंह,
झुके सर तेरे आगे हमारा भगत सिंह।

जोरदार देशभक्ति कविता

वह देश, देश ही क्या, जिसमें लेते हों जन्म शहीद नहीं,
वह खाक जवानी है जिसमें मर मिटने की उम्मीद नहीं।

 

वह पूत, पूत क्या है जिसने माता का दूध लजाया है।
यह भी क्या कोई जीवन है, पैदा होना फिर मर जाना।

 

पैदा हो तो फिर ऐसा हो जैसे तांत्या बलवान हुआ,
मरना हो तो फिर ऐसे मरो जैसे भगतसिंह कुर्बान हुआ।

 

जीना हो तो वह ठान-ठान जो कुंवरसिंह ने ठानी थी,
या जीवन पाकर अमर हुई जैसे झांसी की रानी थी।

 

तोपों पर पीठ बंधाई थी, पेड़ों पर फांसी खाई थी,
पर उन दीवानों के मुख पर रत्ती-भर शिकन न आई थी.

देशभक्ति कविता

वे भी घर के उजियारे थे, अपनी माता के प्यारे थे,
बहनों के बंधु दुलारे थे, अपनी पत्नी के प्यारे थे।

 

पर आदर्शों की खातिर जो भर अपने जी में जोम गए,
भारतमाता की मुक्ति हेतु,अपने शरीर को होम गए।

 

कर याद कि तू भी उनका ही वंशज है, भारतवासी है,
यह जननी, जन्म-भूमि अब भी कुछ बलिदानों की प्यासी है।

बलिदान पर कविता

ऐसा करने में भले प्राण जाते हों तेरे, जाने दे,
अपने अंगों की रक्त-माल मानवता पर चढ़ जाने दे।

 

तू जिन्दा हो और जन्म-भूमि बन्दी हो तो धिक्कार तुझे।
भोजन जलते अंगार तुझे, पानी है विष की धार तुझे।

 

जीवन-यौवन की गंगा में तू भी कुछ पुण्य कमा ले रे,
मिल जाए अगर सौभाग्य शहीदों में तू नाम लिखा ले रे।

Small Poem on Martyrs Day in Hindi

लहू बहा कर सीमाओं पर,
अमन चैन का फूल खिलाया,
अपने प्राणो की बलि देकर,
भारत माँ का मान बढ़ाया।

देश के वीर सपूतों की कविता

इतनी सी बात हवाओं को बताए रखना,
रौशनी होगी चिरागों को जलाए रखना,
लहू देकर की जिसकी हिफाजत हमने,
ऐसे तिरंगे को को सदा अपनी आंखों में बसाए रखना।

वीर जवानों को सलाम कविता

वीर जवानों की गाथाएं तुमको आज सुनाता हूं,
तूफानों में डेट रहे जो उनको शीश झुकाता हूँ,
कर्मपथ के वे अनुरागी मैं तो उनका दास हूं,
उनकी ही आजादी में लेता खुलकर सांस हूँ,
भारत माता के प्रणय हेतु करता ये अहसास हूँ,
गाकर गाथा उन वीरों की मन से मैं मुस्कुराता हूँ,
वीर जवानों की गाथाएं तुमको आज सुनाता हूं।

भारत देश पर प्यारी सी कविता

स्वर्ग की गोद में कैसा नरक पसरा हुआ है,
पग-पग छाया आतंक, हर जर्रा खून से लाल हुआ।

 

कुछ रिश्ते और यतीम हुए कुछ सपने और कुर्बान,
राहे वतनपरस्ती में फिर वीरों ने जान लुटाई,
अपना था वो किसी का सपना था वो जो वहां शहीद हुआ,
जिसकी मौत पर सारा वतन गमगीन हुआ।

 

है नमन सब शहीदों को दिल में गूंजती यह पुकार,
अंत हो आतंक का अब ना जाए ये बलिदान बेकार।

त्याग और बलिदान पर कविता

उठो धरा के अमर सपूतो,
पुनः नया निर्माण करो।
उठो धरा के अमर सपूतो,
पुनः नया निर्माण करो।

 

आसमान भी रोया था
धरती भी थर्राई थी
किसी को न मालुम था यारों
किस घड़ी ये मौत आई थी

 

माँ का एक टक चेहरा था
आँखों में बहते आंसू थे
पुत थे उनके शहीद हुए
जो मातृभूमि के नाते थे

सैनिकों पर हिंदी में देशभक्ति कविता

उनको नमन हमारा कभी नहीं संघर्ष से,
इतिहास हमारा हारा।
बलिदान हुए जो वीर जवां,
उनको नमन हमारा।।
बिना मतलब के वीरों ने,
दुर्बल को नहीं मारा।
जो शहीद हुए सरहद पर,
उनको नमन हमारा।।
उनकी राहों पर हम इन्हें, चलना सिखाएंगे।
उनकी गाथा को कल, ये बच्चे गाएंगे।।
पवित्र देश भारत जो, जन-जन का है प्यारा।
जो बलिदान हुए जो वीर जवां, उनको नमन हमारा।।

पुलवामा के शहीदों पर कविता

वीर जवानों की शहादत पर गूंज रहा था,
सारा देश, वही भगत सिंह थे, वही राजगुरु और वही थे सुखदेव,
भारत माता की आजादी की खातिर,
धरे थे न जाने उन्होंने कितने ही भेष लहूलुहान हुई जा रही थी
भूमि अपनी और बादलों में छाई हुई थी लालिमा,
आजादी-आजादी के स्वरों से गूंज रहा था सारा जहाँ,
इन वीर शहीदों की कुर्बानी से आँखे सबकी भर आई थी,
जब देश के खातिर उन्होंने अपनी कीमती जान गंवाई थी,
वो कल भी थे वो आज भी है अस्तित्व उनका अमर रहेगा
कुर्बानियां कल भी होती थीं और ये सिलसिला यूँ ही जारी रहेगा
नमन है उनकी शहादत को,
सर झुके हैं देख उनका ज़ज्बा,
वीर जवानों की शहादत पर आज भी है, मेरा देश कुरबां।।
Shaheed Diwas Poems in Hindi 2022

कभीं नही सघर्ष से,
इतिहास हमारा हारा,
ब़लिदान हुवे जो वीर जवा,
उनक़ो नमन हमारा हैं।
बिन मतलब़ के वीरो ने,
दुर्बंल को नही मारा,
ज़ो शहीद हुए सरहद पर,
उनक़ो नमन हमारा हैं।
उनकी राहो पर हम इन्हे,
चलना सिख़ाएगे,
उनक़ी गाथा क़ो कल,
ये बच्चें गायेगे।
पवित्र देश भारत ज़ो,
ज़न-ज़न का हैं प्यारा,
जो बलिदान हुवे ज़ो वीर जवा,
उनक़ो नमन हमारा हैं।

 

वे बडे अमर ब़लिदानी थे, फ़ेदे को ज़िसने चूमा था,
मेरा रंग़ दे बसन्ती चोला पर मरतें मरतें भी झ़ूमा था।

 

आदर्शं बनें लाखो युवा के नाम हैं ज़ब तक हैं गगन,
सिंह भग़त, सुख़देव, गुर हैं आपकों शत्-शत् नमन।

Martyrs Day 2022 Poems in Hindi

वीर जवानो की शहादत पर गूज़ रहा था सारा देश,
वहीं भगत सिंह थें, वहीं राज़गुरु और वहीं थे सुख़देव।

 

भारत माता क़ी आज़ादी की ख़ातिर,
धरें थे न ज़ाने उन्होने कितनें ही भेष
लहूलुहान हुईं जा रही थी भूमि अपनी,
और बादलो मे छाईं हुई थी ललिमा।

 

भारत माता कें लाल थें वे, आज़ादी की थी चाह बडी,
भारत माता क़ी शान मे ब़स, चल निक़ले मुश्कि़ल राह बडी।

 

स्वाधींनता के दीवानें थे, गौरो का दम जो निक़ाला था,
नस-नस मे थी आग़ दौडती, ख़ुद को आंधी मे पाला था।

 

इन्कलाब की आग़ देश मे, ख़ुद ज़लकर भी लगाई थी,
मूद कर आंखें सोये थे जो, फ़ोड कर बम यूं ज़गाया था।

 

सच्चें सपूत थें भारत मां के, अपना सुख़-दुःख़ सब भूल गये,
माता की बेडी तोडने को हसते-हसते फ़ांसी झ़ूल गए।

यह भी पढे : 50+ शहीद दिवस पर श्र्द्धांजलि शायरी 

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