SWIFT Sanction क्या है? (SWIFT Sanction Russia) Full Form, रूस पर प्रतिबंध,

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SWIFT Sanction क्या है?

SWIFT Sanction Russia In Hindi (स्विफ्ट सैंक्शन) क्या है, रूस पर प्रतिबंध, फुल फॉर्म, प्रभाव (Kya hai, Ban in Russia, Full Form)


रूस और यूक्रेन के बीच खूनी जंग जारी है. यूक्रेन (Ukraine) पर रूस (Russia) के आक्रमण का आज दूसरा दिन है. इस हमले में कई सैनिकों और आम लोगों की जान जा चुकी है. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की (Volodymyr Zelenskiy) का दावा है कि इस जंग में अभी तक कम से कम 137 लोगों की मौत हो गई है. रूस के सैनिक आधुनिक हथियारों और मिसाइलों के जरिए हमला कर रहे हैं. रूस के इस कदम की दुनिया के कई देश आलोचना कर रहे हैं. वही अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन समेत कई और देशों ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं । इसका मतलब यह है कि अमेरिका और सहयोगी देशों ने रूस के स्विफ्ट सिस्टम पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश की जाएगी। हम किस आर्टिकल के माध्यम से आपको इसके बारे में जानकारी देंगे।


SWIFT (स्विफ्ट) क्या है?

सोसाइटी फॉर वर्ल्डवाइड इंटरबैंक फाइनेंशियल टेलीकम्युनिकेशन, या स्विफ्ट, 1973 में बेल्जियम में मुख्यालय के साथ गठित वित्तीय संस्थानों का एक सहकारी है। यह यूएस फेडरल रिजर्व सिस्टम, बैंक ऑफ इंग्लैंड और यूरोपीय सेंट्रल बैंक सहित अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों के साथ साझेदारी में नेशनल बैंक ऑफ बेल्जियम द्वारा देख रेख करता है।

लेकिन स्विफ्ट एक पारंपरिक बैंक नहीं है और न ही फंड ट्रांसफर करता है। इसके बजाय, यह एक सुरक्षित संदेश प्रणाली के रूप में कार्य करता है जो 200 से अधिक देशों और क्षेत्रों में 11,000 से अधिक वित्तीय संस्थानों को जोड़ता है, जब लेन-देन होने वाला है तो बैंकों को सतर्क करता है। (उदाहरण के लिए, यू.एस. बैंकों के पास अद्वितीय स्विफ्ट कोड होते हैं जिनका उपयोग ग्राहक यू.एस. डॉलर में इनकमिंग वायर ट्रांसफर के लिए करते हैं।)


SWIFT Full Form In Hindi

SWIFT का फूल फॉर्म सोसाइटी फॉर वर्ल्डवाइड इंटरबैंक फाइनेंशियल टेलीकम्युनिकेशन होता है।

प्रतिबंध क्या है?

जब भी कोई देश हमले जैसे तेवर अपनाता है या किसी और देश पर कूट नीतियों का इस्तेमाल कर हमला करता है एवं अंतरराष्ट्रीय कानून को तोड़ता है तब ऐसे समय पर प्रतिबंध इस्तेमाल होता है। कूटनीतिक शब्दावली के मुताबिक़ प्रतिबंध शब्द का इस्तेमाल तब होता है जब कोई देश किसी दूसरे देश के हमलावर तेवरों को रोकने या अंतरराष्ट्रीय क़ानून तोड़ने के आरोप में उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई करता है. प्रतिबंधों का मक़सद किसी देश की अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाना होता है. ये प्रतिबंध इसी मकसद से लगाए जाते हैं. इसके तहत किसी देश के वित्तीय कारोबार, नागरिक, शीर्ष नेताओं को बाधा पहुंचाने जैसे क़दम उठाए जाते हैं. इन देशों पर यात्रा संबधी रोक लगाई जा सकती है. हथियारों की सप्लाई या ख़रीद-फ़रोख्त रोकी जा सकती है ।


रूस पर स्विफ्ट प्रतिबंध (SWIFT Sanction Russia) 

जी7(G7) देश यानी विश्व की सात बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के संगठन के मेंबर्स ने यह सहमति दर्ज की है कि वीर रूस की यूरो, डॉलर, येन और पाउंड के अंतर्गत व्यवसाय करने की क्षमता पर प्रतिबंध लगाएंगे। इसका मतलब यह है कि रूस की वित्तीय क्षमता पर अमेरिका और सहयोगी देश मिलकर प्रतिबंध लगा देंगे।

रूस की वित्तीय क्षमता पर जो प्रतिबंध लगाए जाएंगे उनमें से एक प्रतिबंध जो होगा वह है रूस को स्विफ्ट सिस्टम से हटाना यानी उस पर सीमा लगाना। ऐसा करने से रूस के बैंकों के लिए विदेश में कारोबार करने में बहुत मुश्किलें हो जाएंगी क्योंकि जो देश स्विफ्ट सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं उन देशों के बैंकों के लिए विदेश में कारोबार करना बहुत ही आसान होता है जिससे उनकी अर्थव्यवस्था भी बहुत अच्छी चलती है।


हालांकि इससे उन देशों पर भी प्रभाव पड़ेगा जिसके बैंक रूसी वित्तीय संस्थाओं से जुड़े हैं जैसे अमेरिका और जर्मनी देश।

रूस पर क्या होगा असर?

यू.एस. और उसके यूरोपीय सहयोगियों के लिए, रूस को स्विफ्ट वित्तीय प्रणाली से बाहर करना सबसे कठिन वित्तीय कदमों में से एक होगा, जो रूस की अर्थव्यवस्था को तुरंत और लंबी अवधि में नुकसान पहुंचा सकता है। यह कदम रूस को तेल और गैस उत्पादन से होने वाले मुनाफे सहित अधिकांश अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेनदेन से काट सकता है, जो देश के राजस्व का 40 प्रतिशत से अधिक का हिस्सा है।

स्विफ्ट सिस्टम को अलग करने का निर्णय कब लिया गया था (SWIFT System History) 

आपको बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है जब किसी देश के स्विफ्ट सिस्टम पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की जा रही हो। इतिहास में 2012 में ईरान के खिलाफ इसी प्रतिबंध का इस्तेमाल किया गया था।

जब ऐसा किया गया था तब ईरान की तेल से होने वाली बिक्री से जो अच्छी कमाई होती थी उसमें बड़ी तादाद में गिरावट आ गई थी। इससे ईरान की अर्थव्यवस्था और विदेशी कारोबार को बहुत नुकसान झेलना पड़ा था।  

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