जाने क्या फर्क है इंडिया गेट की अमर जवान ज्योति और वॉर मेमोरियल की ज्योति में?

इंडिया गेट पर 1972 से जल रही अमर जवान ज्योति की मशाल को अब नैशनल वॉर मेमोरियल की मशाल में विलय कर दिया गया है।

एक मिलिट्री समारोह में इंडिया गेट में जल रही मशाल की लौ को वॉर मेमोरियल ले जाकर विलय किया गया।

ब्रिटिश ने पहले विश्व युद्ध में और एग्लो-अफगान युद्ध के दौरान मारे गए करीब 84000 भारतीय सैनिकों की याद में इंडिया गेट बनाया था। यहां ब्रिटिश के लिए लड़े भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि दी जाती रही है।

क्या है इंडिया गेट की अमर जवान ज्योति?

इंडिया गेट पर अमर जवान ज्योति की मशाल 26 जनवरी 1972 को जलाई गई। यह 1971 की जंग में भारत की विजय को मनाने और देश के लिए जान न्यौछावर करने वाले सैनिकों को श्रदांजलि देने कि लिए जलाई गई।

इस जगह पर एक प्लेटफॉर्म बनाया गया है जिसमें एक राइफल है जो बैरल पर खड़ी है और उसके ऊपर हेलमेट है। जिस पर अमर जवान लिखा हुआ है। इसी प्लेटफॉर्म पर मशाल जलती रहती थी।

जब से यह मशाल यानी अमर जवान ज्योति जलाई गई तब से लेकर यह 21 जनवरी 2022 की शाम तक जलती रही। जिसके बाद इसे नैशनल वॉर मेमोरियल की अमर ज्योति में मर्ज कर दिया गया।

अब इंडिया के अमर जवान प्लेटफॉर्म पर मशाल नहीं रहेगी, सिर्फ राइफल और हेलमेट दिखाई देगा।

नेशनल वॉर मेमोरियल में चार लेयर बनाई गई हैं। यानी चार चक्र हैं। सबसे अंदर का चक्र अमर चक्र है जिसमें 15.5 मीटर ऊंचा स्मारक स्तंभ है जिसमें अमर ज्योति जल रही है

क्या है नेशनल वॉर मेमोरियल में?

इसी ज्योति में इंडिया गेट की अमर जवान ज्योति को विलीन किया गया। यह ज्योति शहीद सैनिकों की आत्मा की अमरता का प्रतीक है

वॉर मेमोरियल में दूसरी लेयर है वीरता चक्र, जिसमें आर्मी, एयर फोर्स और नेवी द्वारा लड़ी गई छह अहम लड़ाइयों को बताया गया है।

तीसरी लेयर त्याग च्रक में 25900 से ज्यादा सैनिकों के नाम हैं जिन्होंने देश के लिए अपनी जान दी।

चौथा चक्र है सुरक्षा चक्र, जिसमें 695 पेड़ हैं जो देश की रक्षा में तैनात जवानों को दर्शाते हैं।